दोस्तों सावन का महिना आ रहा है और हम आज Parvati chalisa lyrics पढ़ने वाले है। सब जानते है की यह महिना देवो के देव महादेव का है। महादेव सबसे दयालु और भोले देव है उसी वजह से हम उन्हे भोलेनाथ के नाम से भी जानते है। महादेव के साथ होती है माँ पार्वती और हम उनकी उपासना करना कैसे भूल सकते है। आज हम माँ पार्वती की Parvati chalisa का पाठ करने वाले है और उसके लिए आपको Parvati chalisa lyrics की जरूरत पड़ेगी जिसको हमने नीचे लिखा हुआ है।
parvati chalisa, parvati chalisa lyrics, parvati chalisa aur aarti- पार्वती चालीसा लीरिक्स:
।। दोहा ।।
जय गिरी तनये दक्षजे सम्भू प्रिये गुणखानी।
गणपती जननी पार्वती अम्बे शक्ति भवानी।।
।। चौपाइ ।।
ब्रम्हा भेद न तुमरो पावे। पंच बदन नित तुमको ध्यावे।।
षड्मुख कही न सकत यश तेरो। सहसबदन श्रम करत धनेरों।।
तेऊ पार न पावत माता। स्थित रक्षा लय हित सजाता।।
अधर प्रवाल सद्रुश अरुणारे। अति कमनीय नयन कजरारे।।
ललित ललाट विलेपित केशर। कुमकुम अक्षत शोभा मनहार।।
कनक बसन कंचुकी सजाए। कटि मेखला दिव्य लहराए।।
कंठ मदार हार की शोभा। जाही देखि सहजाही मन लोभा।।
बालारून अनंत छबि धारी। आभूसण की सोभा प्यारी।।
नाना जड़ित सिंहासन। तापर राजित हरी चतुरारण।।
इंद्रादिक परिवार पूजित। जग मृग नाग रक्ष रव कूजित।।
गिर कैलास निवासिन जय जय। कोटिक प्रभा विकासिन जय जय।।
त्रिभुवन सकल कुटुंब तिहारी। अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी।।
है महेश,प्राणेश,तुम्हारे। त्रिभुवन के जो नित रखवारे।।
उनसी पति तुम प्राप्त कीन्ह जब। सुकृत पुरातन उदित भए तब।।
बूढ़ा बैल सवारी जिनकी। महिमा का गवै कोउ तिनकी।।
सदा स्मशान बिहारी शंकर। आभूसन है भुजंग भयनकर।।
देव मगन के हित अस कीन्हों । विष लै आरपु तिनहि अमि दीन्हों ।।
ताकी तुम पत्नी छवि धारिणि । दूरित विदारिणि मंगल कारिणि ।।
देखि परम सौंदर्य तिहारो । त्रिभुवन चकित बनावन हारो ।।
भय भीता सो माता गंगा । लज्जा मय है सलिल तरंगा ।।
सौत समान शम्भु पहआयी । विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी ।।
तेहिकों कमल बदन मुरझायो । लखि सत्वर शिव शीश चढ़ायो ।।
नित्यानंद करी बरदायिनी । अभय भक्त कर नित अनपायिनी ।।
अखिल पाप त्रयताप निकन्दिनि । माहेश्वरी हिमालय नंदिनि ।।
काशी पुरी सदा मन भायी । सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी ।।
भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री । कृपा प्रमोद सनेह विधात्री ।।
रिपुक्षय कारिणि जय जय अम्बे । वाचा सिद्ध करि अवलम्बे ।।
गौरी उमा शंकरी काली । अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली ।।
सब जन की ईश्वरी भगवती । प्रतिप्राणा परमेश्वरी सती ।।
तुमने कठिन तपस्या कीनी । नारद सों जब शिक्षा लीनी ।।
अन्न न नीर न वायु अहारा । अस्थि मात्रतन भयौ तुम्हारा ।।
पत्र गहस को खाद्य न भायउ । उमा नाम तब तुमने पायउ ।।
तप बिलोकि रिषि सात पधारे । लगे डिगावन डिगी न हारे ।।
तब तव जय जय जय उच्चारेउ । सप्तरिषी निज गेह सिधारेउ ।।
सुर विधि विष्णु पास तब आए । वर देने के वचन सुनाए ।।
मांगे उमा वर पति तुम तिनसों । चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों ।।
एवमस्तु कहि ते दोऊ गए । सुफल मनोरथ तुमने लए ।।
करि विवाह शिव सों हे भामा । पुन: कहाई हर की बामा ।।
जो पढ़िहै जन यह चालीसा । धन जन सुख देइहै तेहि ईसा ।।
।। दोहा।।
कूट चंद्रिका सुभग शिर जयति जयति सुख खानी।
पार्वती निज भक्त हित रहहु सदा वरदानी।।
parvati ji ki aarti aur parvati chalisa lyrics- पार्वती जी की आरती और पार्वती चालीसा लीरिक्स:
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता।।
अरिकुलपद्म विनासनी जय सेवकत्राता।
जगजीवन जगदंबा हरिहर गुण गाता।।
सिंह का वाहन साजे कुंडल हैं साथा।
देवबंधु जस गावत नृत्य करत ता था।।
सतयुग रूप शील अति सुंदर नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी सखियन संग राता।।
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्थाता।
सहस्त्र भुज तनु धरिके चक्र लियो हाथा।।
सृष्टि रूप तुही है जननी शिवसंग रंगराता।
नंदी भृंगी बीन लही है हाथन मदमाता।।
देवन अरज करत तव चित को लाता।
गावत दे दे ताली मन में रंगराता।।
श्री “ओम” आरती मैया की जो कोई गाता।
सदा सुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता।।
दोस्तों, पार्वती जी की आरती और पार्वती जी की चालीसा का नियमित पाठ करने से आपके घर परिवार मे सुख शांति और समृद्धि मिलेगी और आपके परिवार पर पार्वती जी और महादेव की कृपया बनी रहेगी।
पार्वती चालीसा लीरिक्स और पार्वती आरती लीरिक्स का पाठ करने का सही समय और तरीका:
पार्वती माँ की चालीसा: पार्वती माँ की चालीसा को सुबह और शाम में पढ़ना अच्छा माना जाता है। सुबह में चालीसा पढ़ने से आपका दिन का शुभ आरंभ होता है, और शाम में पढ़ने से आपके पूरे दिन के काम को पाज़िटिव प्रभाव मिलता है और आपको मीठी नींद आती है।
पार्वती माँ की आरती: पार्वती माँ की आरती को शाम में करना अच्छा माना जाता है, लेकिन आप इसे सुबह भी कर सकते हैं।
- सबसे पहले, पूजा स्थल को साफ़ और पवित्र रखें।
- पार्वती माँ की मूर्ति या चित्र के सामने आरती करने का स्थान तैयार करें।
- प्रयाग की थाली में दीपक, गुग्गुल, कपूर, नरियल, सुपारी, अखरोट, चावल, रुपया, फूल, लाल चूना, काजल, सिन्दूर, रोली, चावल, धूप, बत्ती, पुष्प, और नैवेद्य रखें।
- आरती के लिए विशेष आरती की माला या कपड़े का उपयोग करें।
- आरती के लिए आप गायेंगे "जय जगदम्बे गौरी" या अन्य पार्वती माँ की भजनाएँ।
- आरती गाते समय आप दीपक की आग को आरती करने वाले के सामने घुमाएं, और आरती को पूरी होने पर दीपक को पार्वती माँ की मूर्ति के सामने रखें।
- आरती के बाद, पुष्प, दिव्या गंध, और प्रसाद को पार्वती माँ को अर्पित करें।
- आप अपने मन में पार्वती माँ की कृपा की प्रार्थना करें और उनसे आशीर्वाद मांगे।
दोस्तों, मुजे पूरा विश्वास है की आपको Parvati chalisa lyrics और parvati aarti lyrics को पढ़कर आपको खुशी और आनंद प्राप्त हुआ होगा और आप अपने आपको धन्य और पवन महसूस कर रहे होंगे। मुजे विश्वास है की आपको आपके हर सवाल का जवाब भी मिल होगा। अगर आपको हमारा लेख अच्छा लगा तो इसको शेयर करे और कमेन्ट करना न भूले।
धन्यवाद।।
