Mahisasur mardini Stotram in hindi - महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् हिंदी अनुवाद
महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक स्तोत्र है, जिसे देवी दुर्गा के भक्ति में गाया जाता है। इस स्तोत्र को श्रवण मास के नवरात्रि उत्सव के दौरान विशेष रूप से प,ढ़ा जाता है। इसके माध्यम से माता दुर्गा की महिषासुर वध कथा को स्मरण किया जाता है और उनके शक्ति का अनुभव किया जाता है।
यहां आपको महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् का हिंदी अनुवाद मिलेगा:अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥
अयि शतकण्ठप्रतिभाधिकाप्रगल्भकान्तिकान्तर्धानि
नीलकण्तत्प्रणयिनीकुरुविन्दमण्डरकान्तकान्ताधिपते।
क्षिप्रदक्षिणेश्रितकुचाद्वयकुङ्कुमराणितानने
मध्राशिवायमङ्गले विजयिनि नः कल्याणशैले॥
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्मै नमोऽस्तु भवभयप्रदायिनि।
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्मै नमोऽस्तु भवभयप्रदायिनि॥
अयि रत्नराजहंसकुले तिमिरहारिणि
विभ्राजमानमुरवैरिवधूमुखैरिवाक्षिणि।
निर्मलं बिम्बिताम्बरेशुनितमञ्जुकुमुदमालिनि
धृतपद्मे मुकुन्दमालिनि विरिञ्चिवक्षसि विश्ववन्द्ये॥
कर्मणि त्वं गुणे न रतं क्वयस्त्वं च स्वतन्त्रा भवति
विरिञ्चिस्त्वं विराजसि विश्वविदिता समरङ्गणे।
दुर्गे दुर्गातिहंसिनि दुर्गभावसागरनौके
क्षितिर्वासि करिषिणि द्युतिमिहोवसि विद्युत्पतेः॥
प्रनमामि निगमवेदतात्पर्यविज्ञानदोग्ध्रीमपरिमिताख्यामृतसारम्।
विचित्रभानुस्तनिताभिज्ञानमन्तर्भानुम्मिन्दुशीतलतरां तव चरणयुग्मे॥
या गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते॥
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
